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The strongest system of the season…rain in entire MP | सीजन का सबसे स्ट्रॉन्ग सिस्टम…पूरे एमपी में बारिश: मालवा-निमाड़ में रेड-ऑरेंज अलर्ट; 53 जिलों में हेवी रैन की चेतावनी – Bhopal News

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मध्यप्रदेश में इस मानसून सीजन में बारिश का सबसे स्ट्रॉन्ग सिस्टम एक्टिव है। पूरे प्रदेश में तेज बारिश का दौर है। कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात है और नर्मदा नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। शनिवार को भोपाल, इंदौर, उज्जैन समेत 35 से ज्यादा जिलों में भ

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रविवार को पहली बार 53 जिलों में अति भारी और भारी बारिश का रेड, ऑरेंज-यलो अलर्ट है। मालवा-निमाड़ यानी, इंदौर-उज्जैन संभाग का सूखा भी खत्म होने की उम्मीद है। रविवार को दोनों संभाग के सभी 15 जिलों में पहली बार एक साथ रेड और ऑरेंज अलर्ट है। भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर, नर्मदापुरम, रीवा, शहडोल और सागर संभाग के सभी जिलों में तेज बारिश होगी। वहीं, चंबल के 2 जिले- मुरैना और भिंड में हल्की बारिश होगी। भारी बारिश की चेतावनी नहीं है।

इस वजह से स्ट्रॉन्ग सिस्टम मौसम विभाग के अनुसार, लो प्रेशर एरिया (कम दवाब का क्षेत्र), दो मानसून ट्रफ और दो साइक्लोनिक सकुर्लेशन की वजह से प्रदेश में बारिश का स्ट्रॉन्ग सिस्टम बना है। जिसका असर अगले 4 दिन और रहेगा। यानी, जुलाई की विदाई तेज बारिश के साथ होगी। वहीं, अगस्त की शुरुआत में भी बारिश का दौर जारी रहेगा।

नर्मदा खतरे के निशान से ऊपर, डैम के गेट खोले गए इससे पहले शनिवार को प्रदेश में भारी बारिश का दौर बना रहा। इस वजह से उमरिया के जौहिला डैम, रायसेन में बारना बांध, शिवपुरी के अटल सागर बांध, छतरपुर में बान सुजारा डैम, बैतूल में सतपुड़ा डैम और नर्मदापुरम में तवा डैम के गेट खोल दिए गए।

भोपाल में शनिवार रात से ही रुक-रुककर कभी तेज तो कभी रिमझिम बारिश जारी रहा। इंदौर में तेज बारिश की वजह से सड़कों पर दो फीट तक पानी भर गया। सीहोर के आष्टा में दुकानों में पानी घुस गया। उज्जैन में तेज बारिश से नाला उफान पर आ गया। नाले का पानी महाकाल लोक के प्रवेश द्वारा के पास जमा हो गया। ग्वालियर के डबरा में रामगढ़ नाला उफान पर आ गया। जिससे नंदू का डेरा इलाके में पानी भर गया है। यहां बाढ़ के हालात हो गए।

मंडला में नर्मदा नदी का जलस्तर वॉर्निंग लेवल को पार कर 437.2 मीटर पहुंच गया। जिससे माहिष्मती घाट का छोटा रपटा पुल डूब गया। मंडला जिले में ही एक पुलिया भी बह गई। बालाघाट में कोटेश्वर धाम के गर्भगृह में पानी घुस गया। सिंगरौली में शनिवार को स्कूलों की छुट्‌टी रही।

शनिवार को बारिश की तस्वीरें…

भोपाल में तेज बारिश का दौर रहा।

भोपाल में तेज बारिश का दौर रहा।

तेज बारिश होने से भोपाल के कई इलाकों में जलभराव के हालात बन गए।

तेज बारिश होने से भोपाल के कई इलाकों में जलभराव के हालात बन गए।

एमपी में अब तक इतनी बारिश

एमपी में 23.7 इंच बारिश, 8 इंच ज्यादा बता दें कि प्रदेश में इस मानसूनी सीजन में औसत 23.7 इंच बारिश हो चुकी है, जबकि अब तक 15.6 इंच बारिश होनी थी। इस हिसाब से करीब 8 इंच बारिश ज्यादा हो चुकी है, जो 50% अधिक है। निवाड़ी, टीकमगढ़, ग्वालियर और श्योपुर में तो कोटा पूरा हो चुका है। इन जिलों में सामान्य से 28% तक ज्यादा पानी गिर चुका है। 5 जिलों भी बेहतर स्थिति में है। दूसरी ओर, इंदौर और उज्जैन संभाग सबसे पीछे है। इंदौर, उज्जैन, शाजापुर, बुरहानपुर में 10 इंच से भी कम पानी गिरा है।

एमपी में अगले 2 दिन ऐसा रहेगा मौसम…

भोपाल में बारिश का 10 साल का ट्रेंड भोपाल में जुलाई में खूब बारिश होती है। यहां एक ही महीने में 1031.4 मिमी यानी 41 इंच के करीब बारिश होने का रिकॉर्ड है। यह साल 1986 में हुई थी। 22 जुलाई 1973 को एक ही दिन में 11 इंच बारिश हुई थी, जो अब तक का रिकॉर्ड है। साल 2024 में पूरे जुलाई महीने में 15.70 इंच बारिश हुई थी।

भोपाल में जुलाई महीने में एवरेज 15 दिन बारिश होती है यानी हर दूसरे दिन पानी बरसता है। महीने की एवरेज बारिश 367.7 मिमी यानी 14.4 इंच है। बारिश के चलते दिन का तापमान 30 और रात में पारा 25 डिग्री सेल्सियस से कम रहता है।

इंदौर में इस बार 40% ज्यादा बारिश इंदौर की बात करें तो 24 घंटे में 11.5 इंच बारिश होने का रिकॉर्ड है, जो 27 जुलाई 1913 को हुई थी। वर्ष 1973 में पूरे महीने 30.5 इंच पानी गिरा था। बारिश के चलते यहां भी तापमान में गिरावट देखने को मिलती है।

इंदौर में महीने की एवरेज बारिश 12 इंच है। एवरेज 13 दिन यहां बारिश होती है। पिछले साल इंदौर में पूरे महीने 8.77 इंच बारिश हुई थी।

जबलपुर में जुलाई में गिर चुका 45 इंच पानी बड़े शहरों में जबलपुर ऐसा है, जहां सबसे ज्यादा बारिश होती है। वर्ष 1930 में यहां करीब 45 इंच पानी बरसा था जबकि 30 जुलाई 1915 को 24 घंटे की सर्वाधिक 13.5 इंच बारिश हुई थी। 2013 और 2016 में सबसे ज्यादा बारिश दर्ज की गई थी।

जबलपुर में जुलाई की सामान्य बारिश 17 इंच है। महीने में 15 से 16 दिन पानी बरसता है।

ग्वालियर में कम बारिश का ट्रेंड भोपाल, इंदौर और जबलपुर की तुलना में ग्वालियर में जुलाई के महीने में सबसे कम बारिश होती है। पिछले 10 साल में 6 बार ऐसा हुआ, जब 8 इंच से कम पानी गिरा हो जबकि यहां की एवरेज बारिश 9 इंच के करीब है।

ग्वालियर में वर्ष 1935 में महीने की सबसे ज्यादा बारिश हुई थी। तब 623.3 मिमी यानी 24.5 इंच बारिश दर्ज की गई थी। 24 घंटे में सबसे ज्यादा बारिश की बात करें तो 12 जुलाई 2015 को 190.6 मिमी यानी साढ़े 7 इंच पानी बरसा था। ग्वालियर में जुलाई के महीने में एवरेज 11 दिन बारिश होती है।

उज्जैन में 36 इंच बारिश का रिकॉर्ड उज्जैन में पूरे जुलाई महीने में 36 इंच बारिश का ओवरऑल रिकॉर्ड है। इतनी बारिश साल 2015 में हुई थी। 2023 में 21 इंच से ज्यादा पानी गिर गया था। 24 घंटे में सबसे ज्यादा बारिश 19 जुलाई 2015 को 12.55 इंच हुई थी।

उज्जैन में जुलाई की औसत बारिश 13 इंच है। महीने में 12 दिन पानी बरसता है।

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