Home देश/विदेश साइंस के नए रिसर्च के अनुसार अब बुढ़ापा देर से आता है.

साइंस के नए रिसर्च के अनुसार अब बुढ़ापा देर से आता है.

22
0

[ad_1]

बुढापे की उम्र अब बदल गई है. साइंस के नए रिसर्च भी कह रहे हैं कि अब बुढ़ापा देर से आ रहा है. 20वीं सदी तक बुढ़ापा आम तौर पर 55 या 60 वर्ष की उम्र से माना जाता था. यह सीमा रिटायरमेंट, शारीरिक कमजोरी और बीमारियों की बढ़ती परेशानियों पर आधारित थी. औद्योगिक देशों में औसत जीवन प्रत्याशा 60-65 के आसपास थी, इसलिए 60 को जीवन का अंतकाल माना जाता था. लेकिन अब ऐसा नहीं रहा.

अब ये देखते हैं कि साइंस के नए रिसर्च और WHO क्या कहता है. वैसे वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की रिपोर्ट कहती है, “2030 तक विकसित देशों में हर तीसरा बच्चा 100 साल तक जिएगा. इसका मतलब है कि 60 साल की उम्र अब जीवन का मध्य भाग है, अंतिम नहीं.” नेचर एजिंग जर्नल की वर्ष 2021 में की गई एक रिसर्च कहती है, “बुढ़ापा कैलेंडर की उम्र से नहीं, शरीर की जैविक स्थिति से तय होता है.” द लेंसेट की वर्ष 2022 की पब्लिक हेल्थ रिपोर्ट कहती है कि अब बुढ़ापा 60 या 65 साल पर शुरू नहीं होता बल्कि ये बढ़ गई है.

जापान जैसे देश में जहां जीवन प्रत्याशा 84+ है, वहां बुढ़ापा 70+ से पहले शुरू नहीं होता. नई रिसर्च साफ कहती हैं कि
– उम्र अब शरीर की अवस्था से तय होती है, न कि केवल सालों से.
– 60 साल अब सक्रिय जीवन की “दूसरी शुरुआत” मानी जा रही है, न कि अंत.

WHO (विश्व स्वास्थ्य संगठन) के अनुसार, 2024 में भारत में औसत जीवन प्रत्याशा पुरुषों के लिए लगभग 70.8 साल और महिलाओं के लिए 74.4 साल है. विकसित देशों में यह आंकड़ा 80 के पार है. यानी अगर कोई व्यक्ति 60 वर्ष का है तो वह औसतन और 15-25 साल जीवित रह सकता है और वह भी अपेक्षाकृत सक्रिय रूप से.

आधुनिक रिसर्च अब कैलेंडर के अनुसार उम्र की जगह बॉयोलॉजिकल एज (शरीर की वास्तविक स्थिति) पर ज़ोर देती है. दो 60 वर्षीय व्यक्ति शारीरिक और मानसिक रूप से पूरी तरह अलग हो सकते हैं. कोई रोज़ एक्सरसाइज़ करता है, तनाव से दूर रहता है और हेल्दी खाना खाता है तो उसका शरीर 45 वर्षीय व्यक्ति जैसा हो सकता है.

वैज्ञानिक रिसर्च क्या कहती है?

2017 में The Lancet में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, बुढ़ापे की पारंपरिक सीमा पहले 65 साल से शुरू मानी जाती थी. अब लेकिन शोधकर्ताओं ने प्रस्ताव रखा कि “बुढ़ापा अब तब शुरू होता है जब आपकी जीवन प्रत्याशा के अंतिम 15 साल बचे हों.” यानि बुढ़ापा अब 65 के बाद शुरू होता है और इसे और आगे ले जाया जा सकता है.

60 इज़ न्यू 30- इसका मतलब क्या है?

ये बात आधुनिक समाज में बदलाव के बारे में बताती है. इसका अर्थ ये नहीं कि 60 वर्षीय व्यक्ति वाकई 30 साल का हो गया बल्कि ये है कि 60 साल के लोग अब 30 साल जैसे फिट और बेहतर लगने लगे हैं.
– शारीरिक रूप से अब 60 की उम्र में भी लोग जिम जाते हैं, ट्रेकिंग करते हैं, योगा करते हैं.
– सामाजिक रूप से वो “सहारा लेने वाले” नहीं बल्कि “सहयोग देने वाले” बने हुए हैं
– आर्थिक रूप से रिटायरमेंट अब एक्टिव इन्वेस्टमेंट, कंसल्टेंसी या सेकंड करियर में बदल रहा है.
– हालांकि ये स्थिति अभी शहरों तक ज्यादा सीमित है. गांव में इसकी तस्वीर अब भी पुरानी ही लगती है.

क्यों उम्र केवल एक संख्या

एक सिद्धांत है, जिसको अब साइंटिस्ट भी मानने लगे हैं, अगर कोई व्यक्ति जीवनभर मानसिक रूप से सक्रिय रहता है तो उसका मस्तिष्क उम्र बढ़ने के बाद भी तेज़ बना रहता है. कई बुज़ुर्ग आज “Growth Mindset” अपनाते हैं—यानि सीखते रहना, उत्सुक बने रहना और चुनौतियों को अवसर समझना. ये माइंडसेट उम्र की सीमाओं को तोड़ देता है.

भारत में बुढ़ापे की धारणा में क्या बदलाव

नीति आयोग और हेल्थ मिशन अब बुज़ुर्गों को “स्वावलंबी नागरिक” की तरह देख रहे हैं. मीडिया और विज्ञापन में 60+ मॉडल्स और एक्टर्स को युवाओं की तरह दिखाया जा रहा है. अमिताभ बच्चन, अनुपम खेर, नीना गुप्ता, रजनीकांत जैसे नामों ने इसे और मजबूत किया है.

क्यों अब 60 के बाद भी फिट हैं लोग

बेहतर हेल्थकेयर और जीवनशैली – आधुनिक समय में हेल्थकेयर की गुणवत्ता बेहतर हुई है, जिससे लोग सही समय पर इलाज करा पाते हैं. इसके अलावा, लोग नियमित व्यायाम, सही पोषण और पर्याप्त नींद लेते हैं, जो फिटनेस बनाये रखने में मदद करते हैं.

स्मार्ट एंटी-एजिंग उपाय – लोग स्किनकेयर, सनस्क्रीन का इस्तेमाल, हाइड्रेशन जैसे उपाय अपनाते हैं, जिससे त्वचा की उम्र बढ़ने की प्रक्रिया धीमी होती है और वे ज्यादा जवान दिखते हैं.

बेहतर पोषण और आहार में सुधार – ओमेगा-3 फैटी एसिड वाले भोजन (जैसे मछली, चिया सीड्स, अलसी) को आहार में शामिल करने से शरीर की सूजन कम होती है. जोड़ों, हृदय और मस्तिष्क की सेहत बनी रहती है, जिससे उम्र के प्रभाव कम दिखते हैं.

कम तनाव और बेहतर मानसिक स्वास्थ्य – योग, ध्यान और पर्याप्त रिलैक्सेशन की वजह से लोगों में तनाव कम होता है. वे मानसिक रूप से भी स्वस्थ रहते हैं, जिससे उम्र के निशान कम दिखते हैं.

जागरूकता बढ़ी है – आज के 60-65 वर्ष के लोग अपनी हेल्थ और फिटनेस को लेकर अधिक जागरूक हैं, वे दैनिक दिनचर्या में बदलाव लाते हैं. स्वास्थ्य संबंधी सलाह लेते हैं, जिससे वे सक्रिय और जवान बने रहते हैं.

सोर्स
https://www.nature.com/articles/s43587-021-00073-0
https://www.nia.nih.gov/research/dab/geroscience
https://www.cell.com/cell/fulltext/S0092-8674(23)00010-7
https://www.thelancet.com/journals/lanpub/article/PIIS2468-2667(22)00232-5/fulltext
https://www.weforum.org/agenda/2023/06/the-100-year-life-rethinking-ageing-and-work/
https://www.altoslabs.com
https://www.calicolabs.com

[ad_2]

Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here