[ad_1]
अब ये देखते हैं कि साइंस के नए रिसर्च और WHO क्या कहता है. वैसे वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की रिपोर्ट कहती है, “2030 तक विकसित देशों में हर तीसरा बच्चा 100 साल तक जिएगा. इसका मतलब है कि 60 साल की उम्र अब जीवन का मध्य भाग है, अंतिम नहीं.” नेचर एजिंग जर्नल की वर्ष 2021 में की गई एक रिसर्च कहती है, “बुढ़ापा कैलेंडर की उम्र से नहीं, शरीर की जैविक स्थिति से तय होता है.” द लेंसेट की वर्ष 2022 की पब्लिक हेल्थ रिपोर्ट कहती है कि अब बुढ़ापा 60 या 65 साल पर शुरू नहीं होता बल्कि ये बढ़ गई है.
– उम्र अब शरीर की अवस्था से तय होती है, न कि केवल सालों से.
– 60 साल अब सक्रिय जीवन की “दूसरी शुरुआत” मानी जा रही है, न कि अंत.
WHO (विश्व स्वास्थ्य संगठन) के अनुसार, 2024 में भारत में औसत जीवन प्रत्याशा पुरुषों के लिए लगभग 70.8 साल और महिलाओं के लिए 74.4 साल है. विकसित देशों में यह आंकड़ा 80 के पार है. यानी अगर कोई व्यक्ति 60 वर्ष का है तो वह औसतन और 15-25 साल जीवित रह सकता है और वह भी अपेक्षाकृत सक्रिय रूप से.
वैज्ञानिक रिसर्च क्या कहती है?
60 इज़ न्यू 30- इसका मतलब क्या है?
ये बात आधुनिक समाज में बदलाव के बारे में बताती है. इसका अर्थ ये नहीं कि 60 वर्षीय व्यक्ति वाकई 30 साल का हो गया बल्कि ये है कि 60 साल के लोग अब 30 साल जैसे फिट और बेहतर लगने लगे हैं.
– शारीरिक रूप से अब 60 की उम्र में भी लोग जिम जाते हैं, ट्रेकिंग करते हैं, योगा करते हैं.
– सामाजिक रूप से वो “सहारा लेने वाले” नहीं बल्कि “सहयोग देने वाले” बने हुए हैं
– आर्थिक रूप से रिटायरमेंट अब एक्टिव इन्वेस्टमेंट, कंसल्टेंसी या सेकंड करियर में बदल रहा है.
– हालांकि ये स्थिति अभी शहरों तक ज्यादा सीमित है. गांव में इसकी तस्वीर अब भी पुरानी ही लगती है.
क्यों उम्र केवल एक संख्या
भारत में बुढ़ापे की धारणा में क्या बदलाव
क्यों अब 60 के बाद भी फिट हैं लोग
बेहतर हेल्थकेयर और जीवनशैली – आधुनिक समय में हेल्थकेयर की गुणवत्ता बेहतर हुई है, जिससे लोग सही समय पर इलाज करा पाते हैं. इसके अलावा, लोग नियमित व्यायाम, सही पोषण और पर्याप्त नींद लेते हैं, जो फिटनेस बनाये रखने में मदद करते हैं.
बेहतर पोषण और आहार में सुधार – ओमेगा-3 फैटी एसिड वाले भोजन (जैसे मछली, चिया सीड्स, अलसी) को आहार में शामिल करने से शरीर की सूजन कम होती है. जोड़ों, हृदय और मस्तिष्क की सेहत बनी रहती है, जिससे उम्र के प्रभाव कम दिखते हैं.
जागरूकता बढ़ी है – आज के 60-65 वर्ष के लोग अपनी हेल्थ और फिटनेस को लेकर अधिक जागरूक हैं, वे दैनिक दिनचर्या में बदलाव लाते हैं. स्वास्थ्य संबंधी सलाह लेते हैं, जिससे वे सक्रिय और जवान बने रहते हैं.
सोर्स
https://www.nature.com/articles/s43587-021-00073-0
https://www.nia.nih.gov/research/dab/geroscience
https://www.cell.com/cell/fulltext/S0092-8674(23)00010-7
https://www.thelancet.com/journals/lanpub/article/PIIS2468-2667(22)00232-5/fulltext
https://www.weforum.org/agenda/2023/06/the-100-year-life-rethinking-ageing-and-work/
https://www.altoslabs.com
https://www.calicolabs.com
[ad_2]
Source link



