Home मध्यप्रदेश I had chest pain and anxiety for the last 6 months |...

I had chest pain and anxiety for the last 6 months | 6 महीने से सीने में दर्द और होती थी घबराहट: जांच में पता चला दिल से हो रहा ब्लड लीक, AIIMS में हुई बेंटॉल सर्जरी – Bhopal News

23
0

[ad_1]

हल्के लक्षण भी गंभीर बीमारी के संकेत हो सकते हैं। ऐसा ही एक केस AIIMS भोपाल से सामने आया है। सिहोर निवासी 44 वर्षीय मरीज को करीब 6 माह से सीने में रुक रुक के दर्द और घबराहट होती थी।

.

कई दिनों तक इन्हें गैस-एसिडिटी के लक्षण सोच मरीज ने गंभीरता से नहीं लिया। समय के साथ समस्या बढ़ते-बढ़ते असहनीय दर्द और बेचैनी में बदल गई। मरीज जिले के निजी अस्पताल में गए, वहां उनकी बीमारी पकड़ में नहीं आई। ऐसे में वे AIIMS भोपाल आए। जहां जांच में सामने आया कि मरीज के दिल में ब्लड लीक हो रहा है। यह जानलेवा स्थिति है, ऐसे में उनकी जटिल बेंटॉल सर्जरी की गई।

सिहोर निवासी 44 वर्षीय मरीज ने सर्जरी के बाद विक्ट्री साइन दिखाया।

सिहोर निवासी 44 वर्षीय मरीज ने सर्जरी के बाद विक्ट्री साइन दिखाया।

लगाई आर्टिफिशियल महाधमनी और वॉल्व AIIMS प्रबंधन से मिली जानकारी के अनुसार, संस्थान के कार्डियोथोरेसिक एवं वेस्कुलर सर्जरी (सीटीवीएस) विभाग ने यह अत्यंत जटिल और दुर्लभ हृदय सर्जरी को सफलतापूर्वक किया। मरीज कि छाती की महाधमनी (एओर्टा) में लगभग 8-10 सेमी का बड़ा एओर्टिक एन्यूरिज्म (महाधमनी की सूजन) था। जो लगातार बढ़ रहा था और कभी भी फट सकता था। इसके अतिरिक्त, मरीज का एओर्टिक वॉल्व (हृदय का वॉल्व) भी अत्यधिक लीक कर रहा था। इस गंभीर स्थिति के इलाज के लिए मरीज में बदल कर आर्टिफिशियल महाधमनी और एओर्टिक वॉल्व लगाया गया। जिसे चिकित्सकीय भाषा में ‘बेंटॉल सर्जरी’ कहा जाता है।

रेयर ब्लड ग्रुप था चुनौती इस जटिल सर्जरी में सबसे बड़ी चुनौती मरीज का रेयर ब्लड ग्रुप का होना था। डॉक्टरों ने बताया, मरीज का रक्त समूह बी-नेगेटिव था। इस कारण से कई निजी अस्पताल ने सर्जरी से इनकार कर दिया था। जबकि AIIMS में सर्जरी के दौरान मरीज को रक्त चढ़ाने की आवश्यकता ही नहीं पड़ी।

यह उच्च जोखिम वाली सर्जरी डॉ. योगेश के निवारिया, डॉ. एम किशन, डॉ. सुरेंद्र सिंह यादव, डॉ. राहुल शर्मा, डॉ. विक्रम वट्‌टी और डॉ. आदित्य सिरोही की विशेषज्ञ टीम द्वारा किया गया।

यह उच्च जोखिम वाली सर्जरी डॉ. योगेश के निवारिया, डॉ. एम किशन, डॉ. सुरेंद्र सिंह यादव, डॉ. राहुल शर्मा, डॉ. विक्रम वट्‌टी और डॉ. आदित्य सिरोही की विशेषज्ञ टीम द्वारा किया गया।

निदेशक ने कहा- उपलब्धियों पर गर्व एम्स के निदेशक डॉ. अजय सिंह ने कहा, यह मामला AIIMS की नैदानिक ​​उत्कृष्टता का एक बेहतरीन उदाहरण है। यह पूरा उपचार आयुष्मान भारत योजना के तहत किया गया। जिससे मरीज पर कोई वित्त भार नहीं आया। पहले ऐसे जटिल ऑपरेशन के लिए मध्यप्रदेश के मरीजों को राज्य के बाहर के उच्च स्तरीय केंद्रों में रेफर किया जाता था। अब वे यह इलाज एम्स भोपाल में ही हो रहे हैं। इन उपलब्धियां पर हमें गर्व है।

[ad_2]

Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here