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कोल्हापुर की कोमल कांबले की शादी बहुत कम उम्र में हो गई थी. एक गरीब परिवार की बेटी, जो राजेंद्र नगर इलाके में रहती हैं, कोल्हापुर जैसे शहर में अपनी पहचान बनाना आसान नहीं था. पति कुली का काम करते हैं, और घर की पूरी जिम्मेदारी कोमल के कंधों पर थी—दो छोटे बच्चों की देखभाल से लेकर घर चलाने तक. ऐसे में शिक्षा का सपना देखना भी किसी चुनौती से कम नहीं था. लेकिन कोमल ने कभी हार मानना सीखा ही नहीं था.
बच्चों के भविष्य के लिए खुद को बनाया मजबूत
कोमल का सपना था अपने बच्चों को एक अच्छा भविष्य देना और उसके लिए उन्हें खुद को सशक्त बनाना जरूरी लगा. इसलिए उन्होंने पढ़ाई का रास्ता चुना. चार घरों में साफ-सफाई और खाना बनाने के काम के बीच उन्होंने अपने सपनों को ज़िंदा रखा. एक दिन जिस घर में वे काम करती थीं, वहां की एक चाची ने उन्हें एक बात कही जो उनके दिल को छू गई—”कोमल, तुम कब तक ऐसे ही काम करती रहोगी? पढ़ाई करो, ज़िंदगी बदल जाएगी.” इस एक सलाह ने कोमल की ज़िंदगी की दिशा बदल दी.
नाइट कॉलेज में दाखिला, पढ़ाई और काम के बीच बनाया संतुलन
कोमल ने कोल्हापुर के नाइट कॉलेज ऑफ आर्ट्स एंड कॉमर्स में दाखिला लिया. सुबह 5:30 बजे उठना, बच्चों और घर की देखभाल, उसके बाद 7:30 तक पढ़ाई करना उनका रूटीन बन गया. 9 बजे के करीब वह काम पर निकलतीं और दोपहर 2:30 बजे तक घर लौट आती थीं. फिर शाम 4 बजे तक दोबारा पढ़ाई करतीं और रात को फिर काम पर निकल जातीं. इतना थकने के बाद भी उन्होंने कभी पढ़ाई नहीं छोड़ी. वे कहती हैं, “थक तो जाती थी, लेकिन बच्चों को देखकर खुद को प्रेरित करती थी.”
सपनों को दिशा देने के लिए चुना कॉमर्स
कोमल ने सोच-समझकर वाणिज्य शाखा चुनी, क्योंकि वह भविष्य में खुद का छोटा बिज़नेस शुरू करना चाहती हैं. उन्हें लगता है कि कॉमर्स की पढ़ाई से वे व्यापार और खाता-बही समझ सकेंगी. उन्हें शुरू में गणित से डर लगता था, लेकिन कॉलेज के शिक्षकों ने विषयों को इतना आसान बना दिया कि वह आत्मविश्वास से भर गईं.
शिक्षकों और परिवार का साथ बना ताकत
कोमल की सफलता में उनके कॉलेज, खासकर शिक्षकों का बड़ा हाथ रहा. नाइट कॉलेज के प्रिंसिपल कहते हैं, “कोमल बहुत मेहनती छात्रा रही हैं. उनके जैसे छात्रों की सफलता ही हमारे लिए सबसे बड़ी प्रेरणा है.” कोमल खुद कहती हैं, “मेरे शिक्षकों, मेरी चाची और मेरे पति ने मुझे हमेशा आगे बढ़ने का हौसला दिया.”
अब कोमल बनीं प्रेरणा, आगे बढ़ने की तैयारी
अब कोमल 12वीं के बाद बी.कॉम. में दाखिला लेने की तैयारी कर रही हैं. वह आगे चलकर प्रतियोगी परीक्षाएं देना चाहती हैं ताकि सरकारी नौकरी पा सकें. वे कहती हैं, “मैं अपने बच्चों को अच्छी ज़िंदगी देना चाहती हूं. उनके लिए मैं कोई भी संघर्ष करने को तैयार हूं.” कोमल की कहानी उन लाखों महिलाओं को हिम्मत देती है जो जिम्मेदारियों और हालात के चलते अपने सपनों को छोड़ देती हैं.
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