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Bonded doctors made faculty in Mandsaur, Neemuch, Seoni Medical College | नेशनल मेडिकल कमीशन: मंदसौर, नीमच, सिवनी मेडिकल कॉलेज में बॉन्डेड डॉक्टरों को बनाया फैकल्टी – Bhopal News

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मंदसौर, नीमच और सिवनी में सरकारी मेडिकल कॉलेज शुरू करने के लिए राज्य सरकार नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) को ठगने की तैयारी कर रही है। एमबीबीएस बॉन्डेड डॉक्टरों को इन मेडिकल कॉलेजों में बतौर फैकल्टी तैनात किया जा रहा है। इन बॉन्डेड डॉक्टरों को नियमानुसा

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नहीं की गई चयन प्रक्रिया : बॉन्डेड डॉक्टरों को मेडिकल कॉलेजों में पदस्थ करने के मामले में इतनी जल्दबाजी की गई है कि इसके लिए चयन प्रक्रिया ही नहीं अपनाई गई। सूत्रों की मानें तो मनमाने ढंग से 96 चहेते बॉन्डेड डॉक्टरों को मेडिकल कॉलेजों में पदस्थ कर दिया है। नियमानुसार बॉन्डेड डॉक्टरों को पीएचसी और जिला अस्पताल में पदस्थ कर सकते हैं

450 पद… 150 डॉक्टरों ने ही दी ज्वाइनिंग

विभाग की ओर से नए खुलने जा रहे मेडिकल कॉलेजों में भर्ती के लिए प्रक्रिया की थी। लेकिन, 450 पदों के विरुद्ध 150 डॉक्टरों ने ही ज्वाइन किया है। इधर, विभाग की ओर से तीन मेडिकल कॉलेजों में 150-150 सीट के लिए मान्यता मांगी थी, लेकिन मान्यता नहीं मिली। अब 100-100 सीट के लिए मान्यता मांगी गई है। इसी को ध्यान में रखते हुए विभिन्न पदों पर नियुक्तियां दिखाने की तैयारी चल रही है।

ऐसे कर रहे जुगाड़

  • बॉन्डेड डॉक्टरों को ग्रामीण ड्यूटी पर भेजने के बजाए सीधे मेडिकल कॉलेजों में पदस्थ करने की तैयारी कर ली गई है।
  • एनाटॉमी, फिजियोलॉजी और बायोकेमिस्टि्री की फैकल्टी की तलाश की जा रही है। सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों से इन विभागों में फैकल्टी की जानकारी मांगी गई है। ताकि, नए मेडिकल कॉलेजों में इन फैकल्टी को भेजा जा सके।
  • 2016 में जिन फैकल्टी ने प्रोफेसर बनने के लिए शपथ पत्र दिए थे कि सरकार चाहे तो प्रमोशन के साथ हमारे ट्रांसफर कर सकती है।
  • 1997 से पहले पीएससी से चयनित डॉक्टरों जो प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में पदस्थ हैं उनके ट्रांसफर इन कॉलेजों में करना शुरू कर दिया गया है।

यह एनएमसी के साथ धोखाधड़ी जैसा है

जिस तरह से मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी की कमी दूर करने के लिए बॉन्डेड डॉक्टर की प्रतिनियुक्ति और दूसरे कॉलेजों से ट्रांसफर कर रही है यह एनएमसी के साथ धोखाधड़ी है।
डॉ. राकेश मालवीय, अध्यक्ष, प्रोग्रेसिव, मेडिकल टीचर्स एसो.

एमबीबीएस के बाद बाॅन्ड के तहत ग्रामीण ड्यूटी के अलावा जूनियर रेसीडेंट के तौर पर भी काम कर सकते हैं। इसकी के तहत बच्चों से पूछा गया था। जिन्होंने सहमति दी उनको ट्यूटर और डेमोस्ट्रेटर के तौर पर मेडिकल कॉलेजों में तैनात किया है। – डॉ. एके श्रीवास्तव, संचालक चिकित्सा शिक्षा

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