अरविन्द जैन
भाजपा की पहली सूची में ही जिले की छतरपुर से पूर्व मंत्री ललिता यादव एवं महाराजपुर विधान सभा सीट से कामाख्या प्रताप सिंह(टीकाराजा) को प्रत्याशी घोषित किया गया था।घोषणा के साथ ही भाजपा के समर्पित और जमीनी कार्यकर्ताओं द्वारा जबरदस्त विरोध शुरू कर दिया गया। मौजूदा हालात से भाजपा आलाकमान भी सचेत हुआ। इस विरोध के बाद से ही पार्टी, संबंधित क्षेत्र के कार्यकर्ताओं एवं प्रत्याशियों को लेकर आम जनता का फीडबैक एकत्रित कर रही है और छतरपुर एवं महाराजपुर विधानसभा क्षेत्र में घोषित प्रत्याशी का फीडबैक पार्टी को कमजोर मिला है पार्टी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार घोषित प्रत्याशी का फीडबैक लेने के लिए दो दिन तक एक विशेष टीम छतरपुर एवं महाराजपुर में आम जनता के बीच जानकारी जुटाती रही और उसकी रिपोर्ट केंद्रीय नेतृत्व को भेजी गई है घोषित प्रत्याशी की जीत की संभावना कम होने अथवा स्थिति कमजोर मिलने पर पार्टी प्रत्याशी बदलने पर विचार कर सकती है इस बारे में केंद्रीय नेतृत्व में प्रदेश नेतृत्व को सख्त निर्देश भी दे रखे हैं बताया गया है कि छतरपुर एवं महाराजपुर विधानसभा क्षेत्र में भाजपा द्वारा घोषित प्रत्याशी से न केवल पार्टी कार्यकर्ताओं में वरन आम जनता में भी उत्साह नहीं है। प्रत्याशी घोषित हुए पखवाड़ा बीत चुका है लेकिन प्रत्याशी अपना चुनाव प्रचार भी शुरू नहीं कर पाए हैं
जिसको महाराजपुर सीट से भाजपा ने टिकट देकर नवाजा, वह गत विधानसभा चुनाव लगभग चौदह हजार वोट से हारे पूर्व मंत्री मानवेंद्र सिंह(भंवर राजा) के बेटे हैं। कहा जाता है कि वह कभी भाजपा के किसी कार्यक्रम में न तो सक्रिय रहे और उसके सदस्य तक नहीं रहे। भाजपा आलाकमान ने राजाशाही और परिवारवाद को प्रश्रय देते हुए बिना किसी सर्वेक्षण के यह टिकट घोषित कर दिया। जिसे लेकर भाजपा में असंतोष का जोरदार माहौल निर्मित हुआ। घोषित प्रत्याशी का पुतला तक दहन किया गया। दिल्ली और भोपाल तक जाकर लोगों ने पुरजोर आपत्ति दर्ज कराई। असंतुष्ट लोगों ने बैठकों के दौर चलाकर साफ कहा कि बदलकर किसी और टिकट दिया जाए, तो उसे एकजुट होकर जितायेंगे। अन्यथा हम सभी भाजपा को बुरी तरह हरायेंगे।
इसी तरह छतरपुर प्रत्याशी ललिता यादव का भी विरोध पूर्व प्रत्याशी रहीं अर्चना गुड्डू सिंह और भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा लगातार किया जा रहा है। यहां तक की भाजपा कार्यकर्ताओं की बैठक एवं चुनावी रणनीति से भी प्रत्याशी दूर है इस तरह छतरपुर में भाजपा कार्यकर्ता भी बिखरे हुए हैं और चुनाव को लेकर वह पहले से ही पार्टी का कमजोर कदम मान रहे हैं कार्यकर्ता निराश इसलिए भी हैं कि छतरपुर में कर्मठ कार्यकर्ताओं को दर किनार कर ऐसे प्रत्याशी को उम्मीदवार बना दिया है जो क्षेत्र की जनता से लंबे समय से दूर रहा अब भाजपा कार्यकर्ता उनको आत्मसात नहीं कर पा रहे हैं.
अब तक कार्यकर्ताओं को भी एकजुट नहीं कर सके प्रत्याशी
छतरपुर एवं महाराजपुर विधानसभा में भाजपा के प्रत्याशी अभी तक अपना चुनावी माहौल बनाना तो ठीक भाजपा कार्यकर्ताओं को एकजुट भी नहीं कर सके हैं छतरपुर और महाराजपुर प्रत्याशियों के साथ उनके कर्मचारियों के अलावा दो-तीन लोग साथ रहने वाले ही होते हैं जबकि भाजपा कार्यकर्ता उनसे दूरी बनाए हुए हैं.
क्षेत्रीय कार्यकर्ता एवं पार्टी पदाधिकारी भाजपा प्रत्याशियों से ना तो मिलने पहुंच रहे हैं और ना ही प्रत्याशी बनाए जाने के बाद से उनका स्वागत सत्कार देखने को कहीं मिला है इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि छतरपुर और महाराजपुर में भाजपा प्रत्याशी की घोषणा से कांग्रेस की राह आसान दिख रही है जिससे माना जा रहा है कि सर्वे दल की रिपोर्ट का आकलन होने के बाद भाजपा प्रदेश नेतृत्व छतरपुर एवं महाराजपुर में नए प्रत्याशी को भी चुनावी मैदान में उतर सकती है हालांकि अभी कांग्रेस ने अपने प्रत्याशी घोषित नहीं किये है लेकिन दोनों सीटों पर सिटिंग विधायक छतरपुर से आलोक चतुर्वेदी और महाराजपुर से नीरज दीक्षित के टिकिट लगभग तय माने जा रहे हैं.





