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सागर में मामूली विवाद में केरोसिन डालकर व्यक्ति को जिंदा जलाया, मरणासन्न बयान बने सजा में आधार | Life imprisonment to 5 accused who burnt alive

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सागर42 मिनट पहले

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प्रतिकात्मक फोटो। - Dainik Bhaskar

प्रतिकात्मक फोटो।

सागर में केरोसिन डालकर व्यक्ति को जिंदा जलाने वाले 5 आरोपियों को अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। प्रकरण की सुनवाई विशेष न्यायाधीश प्रदीप सोनी की कोर्ट में हुई। न्यायालय ने मामले में सुनवाई करते हुए हत्या के आरोपी अज्जू उर्फ अजहर पुत्र अनवर पठान उम्र 22 साल, इरफान पुत्र बबलू खान उम्र 19 साल, कलू उर्फ मोहम्मद साबिर पुत्र मो. शरीफ उम्र 23 साल, छुट्टु उर्फ अशरफ पुत्र चुन्ना कुरैशी उम्र 24 साल, बबलू उर्फ डैनी पुत्र गनी खान उम्र 42 साल को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई है। शासन की ओर से प्रकरण में पैरवी अतििरक्त जिला अभियोजन अधिकारी शिवसंजय व सहायक जिला अभियोजन अधिकारी सौरभ डिम्हा ने की।

जिला अभियोजन के मीडिया प्रभारी सौरभ डिम्हा ने बताया कि 14 जनवरी 2020 को फरियादी धनप्रसाद अहिरवार ने मोतीनगर थाने में शिकायत की थी। शिकायत में बताया कि 14 जनवरी 2020 की शाम करीब 4 बजे मोहल्ले में रहने वाला छुट्‌टू मुसलमान, अज्जू, कल्लू, इरफान मेरे घर आए। मैंने उनसे कहा कि तुम मेरे माता-पिता को परेशान मत करो। पिछले कुछ दिनों से तुम मेरे माता-पिता को परेशान कर रहे हो। इसी बात पर से चारों माता-पिता से गालीगलौज करने लगे। गाली देने से मना किया तो चारों घर के अंदर घुस आए और गालगीलौज कर मेरे साथ लात-घूंसों से मारपीट शुरू कर दी। साथ ही जान से खत्म करने की नियत से घर में रखा मिट्टी का तेल मेरे ऊपर डाल दिया और माचिस की तीली जलाकर आग लगा दी। मैंने बचाव करने का प्रयास किया तो चारों आरोपियों ने गालीगलौज कर मारने की धमकी दी।
मरणासन्न बयान बने सजा में आधार
घटनाक्रम की सूचना पर पुलिस पहुंची और आग से झुलसे धनप्रसाद को अस्पताल में भर्ती कराया। मोतीनगर पुलिस ने धनप्रसाद के मरणासन्न बयान लिए। फरियादी ने मरणासन्न कथन में 5 आरोपियों के नाम बताए। जिनमें उक्त 4 आरोपियों के अलावा बबलू कसाई का नाम भी बताया गया। मरणासन्न बयानों के आधार पर पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर जांच में लिया। वहीं गंभीर झुलसे धनप्रसाद को दिल्ली इलाज के लिए भेजा गया। जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। मामले में पुलिस ने हत्या की धारा बढ़ाकर आरोपियों की गिरफ्तारी की। प्रकरण की जांच पूरी होने पर न्यायालय में चालान पेश किया। कोर्ट ने प्रकरण में सुनवाई शुरू की। सुनवाई के दौरान अभियोजन ने प्रकरण से जुड़े साक्ष्य व दस्तावेज पेश किए। न्यायालय ने मामले में सुनवाई करते हुए साक्ष्यों के आधार पर पांचों आरोपियों को दोषी पाया। जिस पर कोर्ट ने सजा सुनाते हुए 5 आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है।

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